Jyotish Kavya - ज्योतिष काव्य
Jyotish Kavya - ज्योतिष काव्य
नव ग्रह बारह राशियों का मेल हैयही ज्योतिष का सारा खेल है
सूर्य तो ग्रहों का राजा है
हर ग्रह को इसने
अपनी रौशनी से नवाज़ा है
गुड़ और गेंहू कारक है
कुंडली में शुभ तो पिता,
सरकार, लाभ दायक है
चंद्र ग्रहों में रानी होता
कारक इसका पानी होता
चंद्र माता को बतलाता
मन में विचार ये लाता
ज्यों-ज्यों ये घटता-बढता
त्यों त्यों मन विचलित रहता
कभी ज्वार-भाटे सा उफ़ान
कभी चित्त शांत हो जाता
राहू साथ विदेश यात्रा कर जाता
केतु साथ धार्मिक बन जाता
अकेला हो समाज से कट जाता
बुद्ध साथ ये धोखा देकर
चरित्र को लगा देता ठोकर
पानी पीना होता गुणदायक
तरल मनी का होता कारक
शिवलिंग दुग्धजलाभिषेक करना
रहता सदा ही लाभदायक
मंगल कर देता दंगल
भाई, रक्त का ये कारक होता
चोट, एक्सीडेंट, झगड़ा
ऑपरेशन मामले में
ये हानिकरक रहता
मंगल जिन-जिन के बलि होते
श्री हनुमान की कृपा मिलती
साहस, शरीर में वे खली होते
बुध ग्रह, बुद्धि दायक होता
वाणी का ये कारक होता
कुंडली मे अकेला ये शुभ होता
श्री गणेश इसके मालिक होते
जिनके बुध अच्छा वे लोग
शेयर और धंधे में माहिर होते
खराब बुध तो होते
मामा से खराब रिश्ते
बुद्धि भी न चल पाती
स्कूल में रोज फटते बस्ते
बृहस्पति तो आखिर गुरु है
सभी मंगल काम
होते इस से शुरू है
पति, बच्चों, ज्ञान,
धन, धर्म और भाग्य
इन सब का कारक होता
पीतवस्त्र, अनुशाषन ढोता
शुक्र ग्रह धन दायक होता
भोग -विलास का कारक होता
स्वभाव से ये मौज-मस्ती
सुख-सुविधा है देता लेकिन
हमको ये संदेश भी है देता
गाड़ी, बंगला, स्त्री और घन की
जरूरत से ज्यादा अति करना
हमेशा ही संघारक होता
काल पुरुष कुंडली में
ये दो और सात का
मालिक होकर मारक होता
शनि कर्म फल दाता है
जो व्यक्ति, बोता है
वही काटता है
कर्मों के हिसाब से ही
शनि फल बाँटता है
लोग नाहक इससे डरते है
ये नहीं किसी को को डराता
केवल ये लोगो से
मेहनत करवाता
तुला राशि में उच्च है
न्यायप्रिय ग्रह सर्वोच्च है
न्याय के तराजू में
सबको तौलता है
पहले खूब रगड़ता है
फिर किस्मत खोलता है
राहु छायाँ ग्रह कहलाता
अँधेरे का कारक होता
मालामाल कर देता
गर कुण्डली में
योगकारक होता
अवैध गतिविधियों का कारक
कुंडली में अशुभ / मारक तो
बहुत ही हानिकारक
सूर्यास्त के बाद
दान देना रहता फलदायक
केतु भी छायाँ ग्रह कहलाया
सर कटा, धड़ रूप में आया
कुण्डली के जिस घर में आता
उस घर का कारक कट जाता
इंसान एकांती हो जाता
समाज से मन फट जाता
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