ज़द्दोजहद है - Jaddojahad Hai
जद्दोजहद है
तुम्हे खोकर भी
पा लिया हमने
टूट कर ही सही,
बेपनाह चाह लिया हमने
अब तो इस बात की हद है
ना तुम्हे खोने का डर है
ना पाने की ज़द्दोजहद है
खो कर पाना, पा कर खोना
रो कर हँसना, हँस कर रोना
जीवन का दस्तूर है
ज़िंदगी क्यों माशूका सी मगरूर
मौत माशूक सी मजबूर है
बेवफ़ा और बावफ़ा में
फर्क केवल इतना ही है
एक बे (ऐ ) है और
दूसरा बा (आ ) है
ऐ में दूर जाने, टूटने का घाव
आ में निकटता का भाव है
एक सोशल मीडिया में
रुकावट के लिए खेद है
दूसरे में प्रतिबद्धता
बिना किसी भेद है
एक बिना बात, बेबात है तो
दूसरे में होती निर्बाध बात है
दोनों के बीच फ़र्क की
इतनी ही ज़द्द है
ज़द्दोजहद है।
कहते है प्यार
ख़ुदा की नेमत है
फिर क्यूँ जिसने भी किया
चुकाई सबने कोई न कोई कीमत है
परिवार से हो तो फ़र्ज़ है
माशूका से तो कर्ज़ है
फ़र्ज़ ज्यादा तो संगदिल
कर्ज़ ज्यादा तो खुदगर्ज है
दोनो के बीच रह जाता सिर्फ
मलाल और मर्ज है
फ़र्ज़ और कर्ज के बीच
बस इतनी ही सरहद है
ज़द्दोजहद है। ज़द्दोजहद है।
- सौरभ गोस्वामी

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