नजर बदलो नज़ारे बदलेंगे - Najar Badlo Najare Badlenge

 नजर बदलो नज़ारे बदलेंगे Najar Badlo Najare Badlenge




नजर बदलो नज़ारे बदलेंगे


जैसी दृष्टि 
वैसी सृष्टी
नजर बदलो 
नज़ारे बदलेंगे
पहले स्वयं बदलो
फिर हजारों बदलेंगे
जैसा स्वभाव
वैसा भाव पाओगे
या तो लाखों सा मोल
या कोडी सा
सम्मान पाओगे
न हो दिल में करुणा
लोगों का दुःख
कैसे जान पाओगे
मत बन स्वार्थी
तू एक 
इन्सान है
रब ने कुछ
अच्छा लिखा होगा
इस बात से 
अंजान है
अब पहले जैसा
मजा नहीं है
हँसी और 
ठिठोली में
न जाने कितना
जहर भरा है
इंसानों की 
बोली में
प्रकृति हो रही
प्राणों की 
प्यासी है
चंहु और फैला
अँधियारा और 
उदासी है
गर हो धैर्य
सफलता
कोशिश की
दासी है
संकट के समय
जो धैर्य 
सीख लेता है
आधी लड़ाई 
वो वैसे भी
जीत लेता है
बेबसी और
उदासी का अँधेरा
चाहे कितना भी
घना होता है
आशा का सवेरा
सदा उज्ज्वल सा
चमकदार 
रोशनी से
बना होता है
निराशा 
निर्बलता का
जिन्न है
आत्मबल ही 
जीवन
कमजोरी 
मृत्यु चिन्ह है
कर कोशिश
कोई ना कोई
हल निकलेगा
आज नहीं तो
कल निकलेगा
थमा-थमा सा है
जो मंजर
तेरे प्रयास से
चल निकलेगा
नियम-कायदे पर
जो भी सख्त होगा
आज और कल
उसी का 
वक्त होगा
बुद्धि जिसकी
उसके पास 
बल होता है,
संयम में हर 
मुश्किल का
हल होता है
विचार पॉजिटिव
शरीर नेगेटिव
ऐसा होना चाहिए
तेरा मोटिव

  
                     - सौरभ गोस्वामी
















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