परशुराम है तू - Parshuram Hai Tu

परशुराम है तू  Parshuram Hai Tu, परशुराम सारे जगत के तुम रखवाले


परशुराम है तू


ब्रह्म तू, ज्ञान तू
ब्रम्हा का वरदान तू
परजनहितार्थ द्विज तू
बल से भी बलवान 
परशुराम है तू।
अब ना सहन कर
रिपु का दहन कर
केवल शांति पाठ से
न होगा काम प्यार से   
बँधे हाथ खोल ले
बाजुओं को तौल ले
अब ना तू त्रस्त रह
ना चन्द्र सा ग्रहण लगा
सांझ सूर्य सा  
ना हो अस्त तू
अपने हक के लिए 
उठा ले परशु शस्त्र तू
शास्त्र से शस्त्र आयाम तक
न तू ले विराम अथक
नाहक बातों में 
ना तू अटक
अपने लक्ष्य से 
ना तू यूं भटक
शेर सी दहाड़ हो
शत्रुओं की चीख,पुकार हो 
मुश्किलों का पहाड़ हो
पहन संतुलन हार तू
बन धैर्य का राम तू
परशुराम है तू।
जल प्रपात मोड़ दे 
संगठन में जोर दे
इतिहास का संज्ञान कर
परम्परा को तोड़ दे।
अब बस बहुत हुआ
विरोध को मुखर कर
कर अपने संस्कारों पर
अभिमान तू, परशुराम है तू।


                            - सौरभ गोस्वामी 
 
 
  
 


 



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